जयपुर। जयपुर के होटल ललित में आयोजित 10वें डिस्ट्रिब्यूशन यूटिलिटी मीट (DUM 2026) के दूसरे दिन विद्युत वितरण नेटवर्क को जलवायु परिवर्तन के खतरों से सुरक्षित रखने पर गहन विचार-विमर्श हुआ। "Climate Resilience and Securing the Physical Assets of DISCOMs" विषय पर आयोजित इस सत्र में भारत और विदेश के प्रमुख ऊर्जा विशेषज्ञों ने चक्रवात, बाढ़, अत्यधिक तापमान और भू-चुंबकीय तूफानों से बिजली ढांचे को बचाने के उपाय साझा किए।
इस उच्चस्तरीय सत्र की अध्यक्षता भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय के संयुक्त सचिव (वितरण) श्री शशांक मिश्रा ने की, जबकि संचालन ISGF के सलाहकार एवं Biosirus Inc. के कार्यकारी अध्यक्ष श्री रवि सेठपथी ने किया। उल्लेखनीय है कि DUM 2026 का आयोजन India Smart Grid Forum (ISGF) द्वारा राजस्थान की तीनों डिस्कॉम्स की मेज़बानी में 27–28 अक्टूबर को किया गया, जिसमें देश की 40 से अधिक वितरण कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
📌 प्रमुख बिंदु
- चक्रवात 'दाना' के अनुभव से GIS मैपिंग और त्वरित बहाली का सफल मॉडल सामने आया।
- AI, IoT और SCADA से फॉल्ट होने से पहले रखरखाव (प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस) संभव।
- स्मार्ट मीटर डेटा से राजस्व प्रबंधन और नेटवर्क संचालन में सुधार।
- सौर तूफानों से उत्पन्न GIC धाराएँ ट्रांसफॉर्मरों के लिए खतरा — मॉनिटरिंग ज़रूरी।
1. आपदा प्रबंधन और त्वरित बिजली बहाली
- चक्रवात 'दाना' का अनुभव: TPCODL के सीईओ श्री गजानन काले ने वर्ष 2024 में ओडिशा के 'दाना' चक्रवात के दौरान GIS मैपिंग, त्वरित संसाधन तैनाती और समन्वित कार्यप्रणाली से बिजली आपूर्ति बहाल करने के सफल प्रयोगों को रेखांकित किया।
- जलवायु जोखिम आकलन: CDRI के लीड स्पेशलिस्ट (एनर्जी) श्री किरण सब्बिनेनी ने आपदारोधी विद्युत नेटवर्क बनाने के लिए जोखिम आधारित निवेश की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
2. AI, IoT और आधुनिक सुरक्षा उपकरण
- प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस: EATON के एसोसिएट डायरेक्टर श्री अनीश थॉमस ने बताया कि सेंसर, IoT, SCADA और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग कर फॉल्ट होने से पहले ही उपकरणों का रखरखाव संभव है।
- CLF फ्यूज तकनीक: दक्षिण कोरिया की Reformtech Co. Ltd. के आरएंडडी इंजीनियर श्री सॉन्ग यंगसब ने सीलबंद CLF फ्यूज तकनीक का प्रदर्शन किया, जो फॉल्ट के दौरान आग, शोर और उपकरणों के नुकसान को नियंत्रित करती है।
3. स्मार्ट मीटरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर सुदृढ़ीकरण
- डेटा आधारित निर्णय: TPDDL के चीफ श्री किरण गुप्ता ने बताया कि स्मार्ट मीटर डेटा से राजस्व प्रबंधन और वितरण नेटवर्क के प्रभावी संचालन में मदद मिलती है।
- बाढ़रोधी सबस्टेशन व माइक्रोग्रिड: BRPL के श्री विष्णु शंकर श्रीवास्तव ने भूमिगत केबलिंग, बाढ़रोधी सबस्टेशन और अस्पतालों जैसी आवश्यक सेवाओं के लिए इमरजेंसी माइक्रोग्रिड विकसित करने का सुझाव दिया।
4. सौर तूफान और GIC का ट्रांसफॉर्मरों पर असर
- भू-चुंबकीय तूफान (GIC): मुंबई विश्वविद्यालय के डॉ. अनिल नारायण राघव ने बताया कि सौर गतिविधियों से उत्पन्न Geomagnetically Induced Currents (GIC) ट्रांसफॉर्मरों में अत्यधिक गर्मी उत्पन्न कर सकते हैं, जिसके लिए समय रहते मॉनिटरिंग और सुरक्षात्मक उपाय ज़रूरी हैं।
निष्कर्ष
DUM 2026 के इस सत्र में विशेषज्ञों ने एकमत होकर कहा कि स्मार्ट तकनीक, मजबूत उपकरण, जोखिम-आधारित नियोजन और पर्याप्त वित्तीय संसाधनों के समन्वय से ही डिस्कॉम्स (DISCOMs) की आपदा सहनशीलता बढ़ाई जा सकती है और आम नागरिकों को निर्बाध बिजली आपूर्ति दी जा सकती है।
